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PNB 11,500 करोड़ की लूट में मेहुल चौकसी का हिस्सा ज्यादा.....

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       आम जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चौकसी ने एक बार नहीं बल्कि पंजाब नैशनल बैंक को कई बार चूना लगाया. एबीपी न्यूज़ की पड़ताल में जो नई बात निकलकर सामने आई है वो ये है कि फर्जीवाड़े के इस पूरे खेल को मामा-भांजे की ये जोड़ी कैसे अंजाम तक पहुंचाती थी और घोटाले में किसका कितना हिस्सा है. मामा-भांजे की ये जोड़ी बैंक से इसलिए कर्ज लेते थे ताकि पुराना कर्ज लैटाया जा सके. वहीं जिस काम के लिए पैसे लिए जाते थे उस काम में कभी निवेश नहीं किया जाता था.      11,500 करोड़ के घोटाले में किसका कितना हिस्सा जांच एजेंसियों का दावा है कि 11,500 करोड़ के इस महाघोटाले में नीरव मोदी का हिस्सा 48,00 करोड़ रुपयों का है. जबकि गीतांजलि समूह के चेयरमैन मेहुल चौकसी का हिस्सा 6,000 करोड़ रुपयों के भी पार है. ऐसे ही कुछ चौंकाने वाले खुलासे उन बैंक अधिकारियों ने भी किए हैं जो इस पूरे घोटालेबाजी का हिस्सा थे.        अपने हीरों के कारोबार को बढ़ाने के नाम पर मेहुल चौकसी और नीरव मोदी लोन के तौर पर बैंक से मोटी रकम उठाया करते थे. लेकिन अब ...

UC News पर पोस्ट लिखकर पैसे कमाये, जाने कैसे

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नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका smart tech में, दोस्तों अगर आप किसी भी पर कुछ भी लिख सकते हो या आप किसी पर भी कुछ नया लिख सकते हो तो आप इससे बहुत सारे पैसे कमा सकते हो। हम आपको पूरी तरह से समझायेंगे की आपको कैसे क्या क्या करना होगा। 1. सबसे पहले तो आपको UC news की वेबसाइट पर जाना होगा। इस साइट पर आप यहां से जा सकते हो- UC News Website Please Open This In Computer Or Desktop Mode In mobile. 2. इसपे क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नयी विंडों खुलेगी जिसमें सबसे नीचे Join Now लिखा हुआ मिलेगा। आपको Join Now पर क्लिक करना है। 3. यहां पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक पूरा फार्म सा आ जायेगा। इसको आपको पूरा भरना होगा। 4. इसके अंदर आपको सब कुछ ठीक से देख कर भरना है। इसमें कुछ गलती ना करें। क्योकिं इसमें आपका जो नाम डाला जायेगा उसी के नाम पर आपकी पेमेंट आयेगी। 5. इस फार्म को भरने के बाद आपको एक मैसेज मिलेगा जिसमें लिखा हुआ मिलेगा की आपका फार्म सबमिट हो गया है और आपको 24 घंटों में मेल मिल जायेगी जब आपका अकाउंट चालू हो जायेगा। 6. जब आपका अकाउंट चालू हो जाये तो...

अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्य की तरह भावनात्मक रूप में भी काम कर पायेगी

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम आते ही दिमाग में एक ही बात आती है कि क्या कभी कोई मशीन इंसान की तरह भी सोच सकती है। अभी तक इस क्षेत्र में जितना भी रिसर्च हुआ है, उसे देखकर तो यही लगता है कि आगामी कुछ सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्य की तरह भावनात्मक रूप में भी काम कर पायेगी। एआई एक ऐसा सिस्टम जो रियल टाइम डाटा के अनुसार वर्क करता है। जिसे हम खतरनाक मिशन पर भेज सकते हैं, युद्द में इस्तेमाल कर सकते हैं, रोजमर्रा के काम करवा सकते हैं। लेकिन मशीनों के ज्यादा इस्तेमाल से इंसान खुद को बेकार महसूस करने लग सकता है। इससे कई तरह की सामाजिक समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। कॉन्शियस मशीनें विभिन्न प्रकार की कानूनी अड़चनें उत्पन्न कर सकती हैं। ऐसी मशीनें ज्यादा समझदार होने पर मनुष्य के ख़िलाफ बग़ावत भी खड़ी कर सकती हैं। डरावना माहौल पैदा कर सकती हैं। इस तरह के शोध पर कई सवाल खड़े होते हैं, कि इन मशीनों पर कौनसे नियम लागू होंगे, इन्हें किस लेवल तक कॉन्शियस पॉवर दिये जाये, इनकी कंट्रोलिंग और मॉनिटरिंग कौन करेगा। ज्यादातर कंप्यूटर वैज्ञानिक यही सोचते हैं कि चेतना एक अद्भुत विशेषता है जो कि ...

क्या गूगल हमारे दिमाग की जगह ले सकता है?

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आज के जमाने में जब सारी जानकारी और सूचनाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं तो फिर आँकड़ों को याद करने की या सूचना हासिल करने की क्या ज़रूरत है। जवाब सीधा और सरल है, संदर्भ के लिये। प्रसिद्द अमेरिकी पेंटर कैनेथ नोलैंड ने एक बार हार्टफॉर्ड यूनिवर्सिटी में दी गई अपनी स्पीच में कहा था कि मेरे लिये संदर्भ या रेफरेंस वह कुंजी है, जो मुझे हर वस्तु के बारे में सोचने समझने की शक्ति देती है। यह एक कला है, जो आपको जीवन का असल रूप दिखाती है। आपके आस-पास किस क्षेत्र में क्या घटित हो रहा है, उससे आपको रूबरू कराती है। यही वो खूबी है जो इंसान को मशीनों से अलग करती है। इसलिये यह कहना गलत नहीं होगा कि जानकारियों का अद्भुत भंडार गूगल सर्च इंजन इंसानी दिमाग की जगह नहीं ले सकता है। इस तथ्य को तुलनात्मक दृष्टि से देखना बिल्कुल गलत है, क्योंकि यह दोनों स्वतंत्र व्यवस्थाएं हैं। इनके बीच किसी तरह की प्रतियोगिता हो ही नहीं सकती। उदाहरण के लिये गूगल पर किसी भी जानकारी को ढूंढने के लिये कुछ निश्चित प्रश्नों या संकेतो का डाटाबेस गूगल के सर्वर पर स्टोर रहता है। जब भी हम कोई शब्द टाइप करते है, गूगल उससे संबंधित सूचना क...

हम जी रहे हैं काल्पनिक दुनिया में क्या आप भी मानते

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दोस्तों यह सवाल हमारे दिमाग में अक्सर आता रहता है कि इस धरती पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई और यह ब्रह्मांड इतनी दूर तक कैसे फैला हुआ है जीवन से यह बताया जाता है कि इस धरती पर जीवन की शुरूआत है भगवान ने की थी भगवान ने हम सब को बनाया है। आज यहां पर हम बात करेंगे कि हम जिस दुनिया में जी रहे हैं वह असली है या काल्पनिक है। या दूसरे शब्दों में कहें तो आप जो आर्टिकल अपने फोन में पढ़ रहे हैं वह असली नहीं है या कहें तो नकली है लेकिन आप उसको देख पा रहे हैं क्योंकि वह फोटो में लिखा हुआ है कभी आपने सोचा है कि इस ब्रम्हांड में जो सब चीजें बनी हुई है वह इतनी अच्छी तरह से क्यों कैसे बनी हुई है जो कि फिजिक्स के ला को फॉलो करते हैं क्यों इस ब्रम्हांड में कभी कोई उत्तल पुथल नहीं होती है। इन सभी सवालों का सीधा सवाल जवाब है सिमुलेशन हाईपरथेमिस जिसकी वजह से हमारी धरती हमारा ब्रह्मांड कितना परफेक्ट है याद भी एक छोटी सी छोटी परमाणु तक यदि आपने मैट्रिक्स मूवी देखी होगी तो हमारा लेख आप को अच्छे से समझ में आ जाएगा। जिसमें यह बताया गया है कि हम लोग कैसे एक प्रोग्राम दुनिया के अंदर रहते हैं। महाभारत में भी अ...